फांसी चढ़ाने से पहले हर कैदी के कान में ये बातें कहता है जल्लाद

जब किसी अपराधी को फांसी देने का समय आता है तो जल्लाद कुछ नियमों का पालन किया करते हैं जिनमें से एक यह है

आजकल मौत की सजा कम ही दी जाती है. अंग्रेजों के जमाने में अपराधियों को मृत्युदंड देना आम बात थी. हालाँकि कई देशों में आज भी मौत की सजा जमकर दी जाती है. लेकिन फांसी से जुड़े उन तथ्यों के बारे में शायद ही जानते हों आप जिनका पालन हर जल्लाद करता है.

फांसी पर चढ़ाने से पहले हर कैदी के कान में ये बातें कहता है जल्लाद
Source

जब किसी अपराधी को मौत की सजा सुनाई जाती है और जब फांसी देने का समय आता है तो कुछ नियमों का बड़ी सावधानी से पालन करना पड़ता है. जैसे फांसी का फंदा, फांसी देने का समय, जिनका अगर ध्यान न रखा जाए तो फांसी की प्रक्रिया अधूरी मानी जाती है.

फांसी देने के लिए एक जल्लाद का होना भी उतना ही जरूरी होता है जितना किसी को मौत की सजा सुनाने के लिए एक जज का होना. ना ही मात्र भारत बल्कि अन्य देशों में अपराधियों को फांसी पर लटकाने का काम जल्लाद ही किया करता है. हालांकि अलग-अलग देशों में जल्लाद को अलग-अलग नामों से जाना जाता है.

जब किसी अपराधी को मौत की सजा दी जाती है तो उसके आखिरी वक्त में उसके साथ जल्लाद ही खड़ा होता है. भारत में फांसी देने से पहले जल्लाद अपने कुछ कर्तव्यों का पालन किया करते हैं. बताया जाता है इस दौरान वह अपराधी के कानों में कुछ बोलते हैं और उसके बाद वो चबूतरे से जुड़ा लीवर खींच देते हैं. इसके बाद ही अपराधी लटक जाता है.

हम आपको यही रहस्य बता रहे हैं कि उस दौरान जल्लाद क्या कहता है. दरअसल जल्लाद फांसी देने से पहले अपराधी के कानों में उसके धर्म के हिसाब से उसे अलविदा कहता है. अंत समय में जल्लाद हिंदूओं को राम राम और मुस्लिमों को सलाम कहने के साथ ही कहता है कि, मै अपने फर्ज के आगे मजबूर हूं. मैं आपके सत्य के राह पर चलने की कामना करता हूं.