वो IAS अधिकारी जिनके नाम से कांपते थे नेता, इस मुख्यमंत्री ने कहा था ‘पागल कुत्ता’

जब नेताओं को पता चला इलेक्शन कमीशन जैसा भी देश में कुछ होता है

भारतीय चुनाव व्यवस्था में बड़े परिवर्तन करने का श्रेय अगर किसी एक शख़्स को दिया जा सकता है तो वो थे महान IAS अधिकारी एवं पूर्व चुनाव आयुक्त टी एन शेषन. टी एन शेषन वही चुनाव आयुक्त हैं जिनके नाम से देश के नेता कांपते थे. कहा जाता है शेषन के कार्यकाल में अच्छे-अच्छे नेताओं ने खून के आंसू रोये थे.

वो IAS अधिकारी जिनके नाम से कांपते थे नेता, इस मुख्यमंत्री ने कहा था 'पागल कुत्ता'
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शेषन भारत के दसवें मुख्य चुनाव आयुक्त थे. उनका कार्यकाल 12 दिसम्बर 1990 से लेकर 11 दिसम्बर 1996 तक रहा था. उनके कार्यकाल में स्वच्छ एवं निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न कराने के लिये नियमों का कड़ाई से पालन किया गया जिसके चलते उनके मंत्रियों एवं नेताओं के साथ कई विवाद हुए.

चुनाव प्रणाली में किये थे बड़े बदलाव 

मतदाता पहचानपत्र हों, या ख़र्चीले चुनाव प्रचार पर रोक हो या फ़र्ज़ी मतदान और चुनाव प्रचार में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग पर रोक हो, सब के पीछे शेषन का नाम लिया जाता है. उन्होंने नेताओं के प्रति ऐसा कड़क रवैया दिखाया था जैसा देश में पहले कभी नहीं हुआ था.

यही कारण था कि कुछ नेता उन्हें ना ही मात्र नापसंद करते थे बल्कि कुछ नेता उनसे नफरत भी करते थे. शेषन को लेकर नेताओं के मन में कितनी नफरत थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि, लंबे समय तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे ज्योति बसु ने उन्हें ‘पागल कुत्ता’ तक कह दिया था.

दरअसल टी एन शेषन ने उस समय पश्चिम बंगाल की राज्यसभा सीट पर चुनाव नहीं होने दिया था जिसकी वजह से केंद्रीय मंत्री प्रणब मुखर्जी को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था. इसी से पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु इतने नाराज़ हुए कि उन्होंने उनके लिए ऐसा अपशब्द कह डाला.

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने भी शेषन के कड़क रवैये का स्वाद चखा था और उनके बारे में कहा था कि, “हमने पहले कारख़ानों में ‘लॉक-आउट’ के बारे में सुना था, लेकिन शेषन ने तो प्रजातंत्र को ही ‘लॉक-आउट’ कर दिया है.”